TechnologyDip

Latest Technology Tips and Tricks, News, How To's, Funny, Jio News

Uttar Pradesh Election Opinion Poll In Hindi Up Vidhan Sabha Election

उत्तर प्रदेश चुनाव का ओपीनियन पोल :-

नोटबंदी के कारण फुर्सत में चल रहे अपने सहयोगी एकाउंटेन्ट से कल कहा कि नेट से डाटा लेकर 2012 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में हुए मतदान में पार्टियों को मिले मत की सूची बनाए और समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के मिले वोटों को जोड़ कर उसकी भाजपा और बसपा के मिले वोटों से तुलना करके बताए कि कितनी सीटों पर यह गठबंधन वर्ष 2012 के वोटों के हिसाब से बढ़त पर है और कितने वर्ष 2014 के वोटों के हिसाब से बढ़त पर है।

एकाउंटेंट द्वारा पहले वर्ष 2014 की दी गणित के अनुसार

1-उस चुनाव में उत्तर प्रदेश की 73 लोकसभा सीट जीत चुकी भाजपा को 357 विधानसभा सीटों पर निर्णायक बढ़त मिली थी। और यदि वही परिस्थिति रही तो 402 विधानसभा सीटों में

• भाजपा को 357 सीट मिलेगी
• बसपा को 8
• सपा को 26
• कांग्रेस को 11

परन्तु स्थिति तो बदल चुकी है और सपा+कांग्रेस का गठबंधन हो चुका है।

2- लोकसभा 2014 के चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के वोटों को यदि मिला दिया जाए तो यह स्थिति ऐसे होती है।

• भाजपा- 270
• सपा+कांग्रेस -126
• बसपा – 6

3- प्राप्त मतों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी के आकर्षण से बसपा के 6% और समाजवादी पार्टी के 3 % यादव वोट मोदी लहर में भाजपा की तरफ आ गये। चुँकि तब यह चुनाव सीधे तौर पर मायावती और अखिलेश यादव के लिए नहीं था जो 2017 में है तो यह तार्किक रूप से 100% संभव है कि 2012 के वोटों जैसी ही स्थिति होगी , यादव और दलित वोट अपने अपने नेता अखिलेश और मायावती के लिए संगठित होकर पड़ेंगे जैसे 2012 में मिले थे, क्युँकि यह चुनाव दोनों के आस्तित्व के लिए हैं तो भाजपा को 2014 में वोट दिए यह वोटर अपनी अपनी मूल पार्टी में आएँगे और प्रदेश में सरकार बनाने के लिए वोट देंगे।

2012 में पार्टियों को पड़े वोटों को मिलाकर यदि हम गणना करते हैं तो स्थिति पूरी तरह पलट जाती है।

समाजवादी+कांग्रेस= 332
बसपा = 40
भाजपा = 20
लोकदल = 6
अन्य = 4

यह है पार्टियों को पिछले दो चुनाव में मिले वोटों को जोड़कर सीटों की वह स्थिति जो होती।

4- अब मेरा ओपेनियन

• भाजपा यह चुनाव बुरी तरह हारने जा रही है , पिछले लोकसभा चुनाव में 41% वोट पाकर 73 लोकसभा सीट जीतने वाली भाजपा , समाजवादी और बसपा के वोटरों का मिला 9% वोट खो रही है और उसके अपने परंपरागत वोटों में भी नोटबंदी के कारण भारी नाराज़गी है और इस चुनाव में अपने उस वोटरों के भी 2-3% वोट नहीं मिलेंगे और सपा+कांग्रेस गठबंधन को पड़ेंगे तो इस कारण कुल अंतर होगा 5% का।

• खैर 2014 के लोकसभा चुनाव में उसके पाए 41% वोटों भारी गिरावट आएगी और वह 25% वोटों तक सिमट जाएगी।

• अखिलेश यादव के साथ सबसे बड़ा प्लस प्वाइन्ट यह है कि 5 साल की सरकार चलाने के बाद भी उनपर 4 आने के भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है , और वह अपनी छवि “सफेदी की चमकार” की तरह बनाए हुए हैं , हर चुनाव में सत्ता के विरुद्ध उभरने वाला ऐन्टी इंकम्बेसी भी इस बार कहीं नहीं है जिसका लाभ उनको मिलेगा ही मिलेगा।

• पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट भाजपा से लगभग दूर हो चुका है और वह फिर से अजीत सिंह को वोट देने जा रहा है जो भाजपा को और चोट मारेगा।

• बसपा अपने नेतृत्व मायावती के अड़ियल रुख के कारण हारेगी , ओवैसी-डाक्टर अयूब-मौलाना रशादी , लगातार खुलकर बसपा से गठबंधन करने का निमंत्रण दे चुके थे जिसको मायावती को 6 महीने पहले ही लपक लेना था , यह करके वह यदि इन सभी नेताओं के साथ रैली करतीं तो समाजवादी पार्टी के मुसलमान वोटरों को अपनी तरफ बहुत हद तक खींच सकती थीं , विफल रहीं।

• 75% मुसलमान वोटर चाहता था कि मायावती मुस्लिम कयादत की पार्टियों से गठबंधन करें जिसे मायावती भाँप ना सकीं और मुस्लिम नेतृत्व ना उभर जाए इस डर से गठबंधन ना कर सकीं। यह फैसला उनके लिए घातक होगा।

• मुजफ्फरनगर और मुसलमानों के लिए कुछ ना कर पाने के गुस्से के बावजूद मुसलमान सपा+कांग्रेस गठबंधन के पक्ष में पूरी तरह कन्सालिडेट होगा और अपनी परंपरागत मजबूरी के अनुसार भाजपा को हराने के लिए ही अंततः वोट देगा और सबसे मजबूत विकल्प सपा+कांग्रेस गठबंधन ही उसका आखिरी विकल्प होगा।

• मुसलमान समाजवादी पार्टी की सरकार से खुश नहीं है परन्तु वह चाह कर भी मायावती पर विश्वास नहीं कर पा रहा है जिसका कारण उनका पिछला इतिहास और बयान है।

• कांग्रेस का 10% परम्परागत वोट कांग्रेस की बुरी से बुरी स्थिति में उसके साथ है यहाँ तक की मोदी की प्रचंड लहर 2014 में जबकि बसपा-सपा का वोटर भाजपा को गया वहीं कांग्रेस का वोट कांग्रेस के साथ ही बरकरार रहा।

• सपा+कांग्रेस के गठबंधन से वोट पूरी तरह ट्रांसफर होंगे क्युँकि सपा का वोटर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट देगा ही देगा और कांग्रेस का वोटर अपने आस्तित्व बचाने की उम्मीद को ज़िंदा रखने के लिए।

• इलाहाबाद की मेरी अपनी पश्चिमी विधानसभा का उदाहरण सामने रखूँ तो ऐसी स्थिति होगी।

1- बसपा की पूजा पाल ( 72000 वोट पाकर विजयी)
2- अद के अतीक अहमद ( 62000 वोट )
3- समाजवादी पार्टी (18000 वोट)
4- कांग्रेस 6000
5- भाजपा – 12000 वोट

अब बदली परिस्थिति में अतीक अहमद का पूरा 62000 वोट गठबंधन को जाएगा और सपा के 18000 वोटों तथा कांग्रेस के 6000 वोटों को जोड़कर यह वोट होता है 86000 , जो पूजा पाल के वोट से 14000 अधिक हैं। इस क्षेत्र से गठबंधन की रिचा सिंह जीत रही हैं।

● सीटों का पुर्वानुमान

तमाम गुणा भाग और पिछले दो चुनाव में हर पार्टी को मिले वोटों के प्रतिशत का आकलन करने पर पार्टियों को निम्नलिखित संख्या में सीट मिलने की संभावना है।

1- सपा+कांग्रेस गठबंधन = 235
2- भाजपा = 90
3- बसपा = 60
4- लोकदल = 12
4- अन्य = 5 (पीस 2 और मीम 1 आरयूसी 1)

■ नोट कर लीजिए , चुनाव होने के ठीक पहले एक और पुर्वानुमान घोषित करूँगा जो अंतिम होगा क्युँकि चुनावी प्रचार और हथकंडों से कुछ परिवर्तन तो आ सकता है पर सरकार गठबंधन की ही बनेगी क्युँकि पार्टियों के सेट वोटरों का बहुत अधिक इधर उधर होना असंभव है।

यह आज की गणितीय स्थिति है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

TechnologyDip © 2017 Frontier Theme